हम भारत के लोग

नोट
( इसकी प्रस्तुति २६ जनवरी , २०२५ को सेंट मेरीज़ इंग्लिश मीडियम स्कूल में हुई थी )
* अधिकतम 12 लोग इस मंच में रहेंगे तो बेहतर होगा।
* सामान्यतः नुक्कड़ प्रस्तुतियों में एक वेशभूषा में पात्र होते हैं पर इसे अगर मंच में किया जाए तो इसमें कुछ पात्र अपनी वेशभूषा में होंगे। इसे तो नाटक तैयार कराने वाले तय करेंगे पर एक सुझाव है कि किसी पात्र को देखने के जेंडर लेंस से इतर जेंडर को प्रस्तुत किया जाना बेहतर होगा जैसे मजदूर और किसान के रूप में स्त्री या ड्राइवर के रूप में स्त्री या ट्रांस।
पात्र परिचय
किसान
मजदूर
शिक्षक
सैनिक
ड्राइवर
सफाईकर्मी
डॉक्टर
इंजीनियर
अफसर
लेखक
विद्यार्थी
प्रवासी
ट्रांस मेन या ट्रांस वूमेन
( दो तरफ से लोग पहले दो घेरा बनाते हुए गाएंगे और खत्म करते अर्धचंद्राकार खड़े हो जाएंगे)
(फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म )
तेरे पैग़ाम पर ऐ वतन ऐ वतन
आ गए हम फ़िदा होकर तेरे नाम पर
तेरे पैग़ाम पर ऐ वतन ऐ वतन
आ गए हम फ़िदा होकर तेरे नाम पर
नज़्र क्या दें कि हम मालवाले नहीं
आन वाले हैं इकबाल वाले नहीं
हाँ! यह जां है कि सुख जिसने देखा नहीं
या ये तन जिस पे कपड़े का टुकड़ा नहीं
अपनी दौलत यही, अपना धन है यही
अपना जो कुछ भी है, ऐ वतन है यही
वार देंगे यह सब कुछ तिरे नाम पर
तेरी ललकार पर, तेरे पैग़ाम पर
तेरे पैग़ाम पर ऐ वतन ऐ वतन
सूत्रधार : नमस्ते, सतश्री अकाल, आदाब, जोहार ! जी हाँ दोस्तों, भारत हमारा घर है, आशियाना है।
कोरस : घर है, आशियाना है।
सूत्रधार : हम यहीं रहते हैं, बड़े होते हैं, काम करते हैं, पढ़ते और खेलते हैं।
कोरस : हाँ, हाँ पढ़ते और खेलते हैं।
सूत्रधार : हमें प्यारी हर वो चीज, हर जगह और लोग , सब यहीं हैं। यही भारत है, जहां हमारे सपने पलते हैं और पूरे होते हैं।
कोरस : हमारे सपने पलते हैं और पूरे होते हैं।
सूत्रधार : हम हिन्दुस्तानी एक परिवार है। यह हमारा साझा आशियाना है।
एक : हम एक-दूसरे से जुड़े हैं और एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
दो : हम इस आशियाने को मिलकर संवार रहे हैं।
तीन : भारत हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।
सभी : हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।
(सभी गुनगुनाते हुए अपने काम करने का अभिनय करेंगे)
तेरे पैग़ाम पर ऐ वतन ऐ वतन
आ गए हम फ़िदा होकर तेरे नाम पर
तेरे पैग़ाम पर ऐ वतन ऐ वतन
आ गए हम फ़िदा होकर तेरे नाम पर।
( इसी में से अब सभी पात्र अपने-अपना परिचय देंगे अपने काम करते )
पात्र एक :मीठा बोलता, मीठा बनाता , मीठा खा लो। मीठा पसंद न हो तो नमकीन वमकीन खा लो।
मैं इक़बाल चंद इंदौर में रहता हूँ, हलवाई हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र दो : सोज़नी, कानी, अमली, रेजकर, टिल्ला, डोरी, चंबा, कारचोब कसीदाकारी करा लो। डोरिंग , स्टेन, साटीं, और चैन स्टिच करा लें।
मैं सारा सिंह भोपाल में रहती हूँ, कसीदाकार हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 3 : कभी फल , कभी कपड़े तो कभी आभूषण की दुकानदारी करता हूँ।
मैं इक़बाल पालकीवाला जमशेदपुर में रहता हूँ, व्यापारी हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 4 :पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो
पढ़ना-लिखना सीखो ओ भूख से मरने वालो।
क ख ग घ को पहचानो
अलिफ़ को पढ़ना सीखो
अ आ इ ई को हथियार
बनाकर लड़ना सीखो
मैं जॉन इक़बाल पटना में रहता हूँ, पढ़ाने का काम करता हूँ , हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 5 : गुलाब, टयूलिप, लिली, हाईड्रेनजिया, कारनेशन, गेंदा, गुलदाउदी, ऑर्किड, सेलोसिया,ले लो ले लो।
मैं सारा अहमद कोलकाता में रहती हूँ, फूल बेचती हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 6 : किस्मत हल को खेत में कृषक रहा हैं सींच
माटी को सोना करे श्रम से अपना सींच।
मैं इक़बाल सुरजीत पटियाला में रहता हूँ, किसान हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 7 : बिरयानी बिरयानी हैदराबादी कोलकाता, चेन्नई, वेलोर, केरल, कश्मीर और पंजाब दी बिरयानी।
मैं इक़बाल महमूद हैदराबाद में रहता हूँ, बिरयानी बेचता हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 8 : किंगफिश, पोमफ्रेट, डूमर, टूना, मैकरेल, केंकड़ा, झींगा, टाइगर झींगा,,शार्क, लॉबस्टर, स्क्विड और मसल्स वाली गोवा की छोकरी।
मैं सारा फर्नार्डीज़ पणजी में रहती हूँ, मछली बेचती हूँ, भारतीय हूँ।
पात्र 9 : फूलों को, अनाज को, मीट को मच्छी को इस देस से उस देस ले जाने वाली हूँ मैं सारा देशमुख जबलपुर में रहती हूँ, ड्राइवर हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 10 : चलो, चलो, चलो, चलो।
चलो, चलो, चलो, चलो।
भैंसा, भभुआ, कुत्ता, पू, काला बकरा
लोलपुर, टट्टईखाना, कॉकबर्न रोड और भागलपुर
इन सब जगहों और ऐसे ही कई टेशनों से चलकर हम पहुंचते हैं चाय बगान में। मैं इक़बाल सिंह गुवाहाटी में रहता हूँ, चाय मजदूर हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 11 : मैं इक़बाल कश्मीर में रहता हूँ,डोंगी कहलाता हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ।
पात्र 12 : मैं सारा किन्नर हूँ, भारत मेरा देश है, हिन्दुस्तानी हूँ।
( परिचय के बाद अपने नाम/काम को बोलते एक शोर सा/कोलाहल होगा। इसके बाद एक स्वर उठेगा हो हो हो ।। और गीत गाएंगे सभी)
अज्ञात गीतकार
हम सब इस जहान में ज़िंदगी के गीत गाएं
मुक्ति के गीत गाएं, गीत गाएं।
गीतों से अँधियाँ मचल उठे
लाल फूल हर तरफ खिल उठे
नगमों से डर के मौत भाग जाए
सुन के सुर ज़िंदगी सुराग पाए
रात में चिराग आशा का जले
इस जहां में हम वो गीत गाएं जाएं
हम सब इस जहां में ………
2 रा
एक : यह सब बहुत ख़ूबसूरत है पर अपने इस आशियाने और परिवार की इन जिम्मेदारियों को हम कैसे निभाएं?
दो : देश को हम किस दिशा में लेकर जाएं?
तीन : एक भारतीय होने के नाते हमारे अधिकार और कर्तव्य क्या हैं?
चार : सभी देशवासियों के साथ हमारा रिश्ता और व्यवहार कैसा रहेगा ?
सूत्रधार : हाँ तो दोस्तों हम अपने देश और उस किताब का ज़िक्र कर रहे थे जिसमें हमारे जीने को दिशा दिखाई है।
पांच : भारतीय संविधान हमें अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का रास्ता दिखाता है।
छह : वो हमारे सभी संदेहों को दूर करता है।
सात : सवालों के जवाब देता है।
आठ : हमारा संविधान हर भारतीय के सपनों को एक मजबूत राष्ट्रीय तानेबाने में बुनने का रास्ता दिखाता है।
सूत्रधार : जब हमारा देश आज़ाद हुआ तो हम सभी ने मिलकर तय किया कि
कोरस :
— हमारा राष्ट्रगान “जन गण मन होगा।
— हमारा झण्डा तिरंगा होगा।
— हमारा राष्ट्रीय पशु शेर होगा।
— हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर होगा।
— हमारा राष्ट्रीय फूल कमल होगा।
सूत्रधार : यह सब और हम नागरिकों के मौलिक अधिकार और कर्तव्य भी इस किताब संविधान में लिखेँ हैं।
दो : संविधान में और क्या लिखा है ज़रा समझा के बोलो न ?
सूत्रधार : हाँ , हाँ क्यों नहीं । हम भारत के लोगों ने मिलकर तय किया है कि हम भारत को ऐसा देश बनाएंगे जहां-
1,2,3 : नागरिक ही तय करेंगे कि हम क्या करें। कोई दूसरा देश हमें नहीं बताएगा। यहाँ के लोग ही यहाँ के मालिक हैं। सरकार का काम जनसेवा है। उसे जो भी अधिकार मिलें हैं वो जनता ने ही, जनता के लिए, देश चलाने के लिए उसे मुहैया कराएं हैं यानि प्रभुत्वसम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य।
4,5,6 : देश के लोग मिलकर ही देश की संपत्ति बनाएंगे और इन पर हम सबका बराबर हक़ होगा। हम इस साझा संपत्ति के जरिए समाज के सबसे गरीब हाशिये पर खड़े लोगों की भलाई के लिए काम करेंगे। हम ऐसे देश का निर्माण करेंगे जहां पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, जीवन की बुनियादी जरूरतें हर नागरिक का मौलिक अधिकार होगा ।
7,8,9 : सरकार किसी एक धर्म का पक्ष नहीं लेगी। सब अपनी मर्ज़ी से अपने धर्म का पालन करेंगे। सब धर्मों और मान्यताओं का आदर होगा यानि पंथ निरपेक्ष होगी सरकार।
10,11,12 : ऐसी सरकार होगी जिसे जनता ने चुना है और जो लोगों के भले के लिए काम करेगी। लोग स्वतंत्र मतदान कर सकेंगे।
1,2,3 : सभी लोगों के साथ इंसाफ , ईमानदारी का व्यवहार हो। सबको रोज़ी-रोटी कमाने के बराबर अवसर हो।
4,5,6 : सबको अपनी सोच की, बोलने की, लिखने की, अपनी मर्ज़ी के दोस्त बनाने की, घूमने-फिरने की आज़ादी हो, बस ध्यान रहे कि किसी और को किसी से नुकसान न पहुंचे।
7,8,9 : सभी के साथ एक जैसा बर्ताव हो। चाहे उनका धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान कोई भी हो, चाहे वो अमीर हो या गरीब।
तो चलिए संविधान की प्रस्तावना आज के ख़ास दिन और नियमित पढे जाने और उसको अभ्यास में लाने की कोशिश शुरू की जाए।
हम भारत के लोग
भारत को एक
‘सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए
तथा उसके समस्त नागरिकों को ;
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय;
विचार, अभिव्यक्ति,विश्वास,धर्म और उपासना की स्वतंत्रता;
प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सबमें,
व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित कराने वाली,
बंधुता बढ़ाने के लिए,
दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधान सभा में आज तारीख। ………
(26 नवंबर 1949) को एतद द्वारा इस संविधान को
अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।









जीवन में विश्वास के बूते हम बहुत कुछ कर पाते हैं और स्वयं की क्षमताओं को परख पाते हैं। इस नुक्कड़ नाटक को तैयार करने के पीछे निभा दीदी का विश्वास रहा जिसकी वजह से यह प्रस्तुति तैयार हो पाई। दो शिक्षिका निभा दीदी और दीपान्विता जो इस स्कूल में बच्चों और स्कूल की प्रिय शिक्षिकाओं में शुमार हैं इसे मैंने महसूस किया प्रतिभागी बच्चों के साथ उनके संवाद से। टीनएज बच्चों से संवाद की पारदर्शिता और अधिकारभाव से इस उम्र के बच्चों की बहुत सी परेशानियों को हल किया जा सकता है। आज के समय में जब आने वाली पीढ़ी के मिज़ाज में बहुत तेज़ी से परिवर्तन हुआ है ऐसे में इन किशोरों के साथ संवेदनशीलता के साथ दोस्ताना और अधिकार भाव दोनों ही ज़रूरी चीज़ हैं जिससे इस उम्र की गलतियों और भटकाव से ये बच सकते हैं।



