एक शाम कैफ़ी आज़मी के नाम
‘जमशेदपुर इप्टा का तरही मुशायरा’ 10 मई का दिन होता है कैफ़ी आजमी को याद करने का। इन्क़लाब और आज़ादी
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Read More‘जाति व्यवस्था श्रम का बंटवारा ही नहीं है बल्कि श्रमिकों का भी बंटवारा है ‘ – भीमराव अंबेडकर इस वाक्य
Read Moreमेहनत से ये माना चूर हैं हमआराम से कोसों दूर हैं हमपर लड़ने पर मजबूर हैं हममज़दूर हैं हम मज़दूर
Read Moreकिसी देश की यात्रा से हम उस देश के नागरिकों की सामाजिक-राजनैतिक स्थिति और संस्कृति से परिचित होते हैं। अकसर
Read Moreसाहिर की 105 वीं जयंती पर उन्हें याद करना सिर्फ एक रवायत नहीं बल्कि उनके बेहतर दुनिया देखने और जीने
Read Moreकविता में तस्वीर है जीवन कीरंग है बचपन का। बाँकपन है जवानी काएहसास है ढलती उम्र का। कविता—आगाज़ भीआवाज़ भीहुस्न
Read Moreकविता के आँगन में बसर करना कविता से बात करना कविता के साथ मौन चलना कविता के साथ रोना-हँसना और
Read Moreसुजल की कविता उम्मीद की रोशनी है। आज उसे दो विषय दिए जो एक-दूसरे से जुड़े थे और उसने यह
Read Moreकविता वक्तव्य नहीं गवाह है-कुंवर नारायण कविता वक्तव्य नहीं गवाह हैकभी हमारे सामनेकभी हमसे पहलेकभी हमारे बाद कोई चाहे भी
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