याद ए पुरखेरिपोर्ट

भगत सिंह जयंती

भगत सिंह की 119 वीं जयंती पर भारतीय जननाट्य संघ, जमशेदपुर इकाई ने भगत सिंह के विचारों और उनके साथियों पर केंद्रित कार्यक्रम का आयोजन किया। भगत सिंह को तर्कशीलता और विचार के लिए निरंतर याद करते रहने के बावजूद इस ख़ास दिन यानी भगत सिंह जयंती में याद किया जाना ज़रूरी है। इस आयोजन मने लेखक संघ,पथ, प्रगतिशील लेखक संघ,साझा नागरिक मंच,आरंभ युवा मंच,सृजन भारती, जमशेदपुर म्यूजिक सर्कल के स्थानीय साथी उपस्थित रहे ,स्थानीय साथियों के साथ ख़ास दिन मनाया जाना हमेशाअलहदा अनुभव देता है और कहीं न कहीं ये हमारे काम और विचार को विस्तार देता है।

बाएं से अर्पिता,साहिल,अभिषेक,मुस्कान,पीहू,अभिषेक

लिटिल इप्टा के साथियों द्वारा धीरे – धीरे भगत सिंह के विचारों को पढ़ा जाना और जानने – समझने की कोशिश करना आश्वस्ति की चमक को निखार रहा है। इप्टा के बच्चों के लिए किए जाने वाले हर आयोजन के पीछे का मकसद यही होता है कि हम इससे पहले कुछ दिन थोड़ा-थोड़ा करके पढ़ें, विचार करें और अपनी समझ समृद्ध करें।

इस बार की तैयारी में नन्हे और किशोर साथियों के साथ हमने भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा की गई तीन भूख हड़ताल क्रमशः 112 दिन, 15 दिन और 27 दिनों के बारे में जान, दुर्गा भाभी और लाल हरदयाल के बारे में पढ़ा। छबीलदास की बेटी मनोरमा दीवान का भगत सिंह और उस दौर की यादें उनके संस्मरण ‘ भगत सिंह मार्फत छबीलदास ‘ पढ़ा। इसी के माध्यम से पता चला कि नेशनल कॉलेज, लाहौर में अंग्रेज़ी पढ़ाते हुए छबीलदास वहां पर प्रिंसिपल हुए, उन्होंने उर्दू दैनिक वन्देमातरम का संपादन किया उसके अलावा चिंगारियां, इंक़लाबी शरारे, इंक़लाब ज़िन्दाबाद, भारत माता का दर्शन, नौजवानों से दो बातें, हम स्वराज क्यूँ चाहते हैं और सोशलिज्म मुख्य हैं। इस संस्मरण से जानकारी मिलीं कि भगत सिंह जब नेशनल कॉलेज लाहौर में दाखिला लेने आए थे तो वे केवल हाई स्कूल पास थे इंटर की परीक्षा भिनपास नहीं किए थे। उनका इंटरव्यू लेनेवालों में परमानंद और प्रिंसिपल छबीलदास मुख्य व्यक्ति थे। भगत सिंह से बहुत से सवाल पूछे गए। उनके बौद्धिक ज्ञान ,इतिहास, अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान और साहित्य का ज्ञान प्रभावित करने वाला था साथ ही वे छबीलदास द्वारा अंग्रेज़ी में पूछे गए सवालों के जवाब बहुत अच्छी अंग्रेज़ी में दे रहे थे। इसके अलावा अर्जुन सिंह गड़गज का संस्मरण ‘ जब भगत सिंह ने सकीना के विवाह में अंगूठी दी ‘ पढ़ा जिसमें गरीब किसान इब्राहिम की लड़की के ब्याह के लिए उन्हें लाला पहाडचंद से मिली हीरे की अंगूठी देकर गरीब किसान की मदद की बात पता दिल को छू लेने वाली महसूस हुई । बच्चों के संग भगत सिंह की संवेदशीलता के किस्से पढ़ना हमेशा ऊर्जा देता है। बहुत सी ज़रूरी बातें अब बच्चों को याद होते जा रही हैं जो हमारा हासिल है।

भगत सिंह के बारे में आपसी संवाद अदायगी के बाद पूर्व में तैयार वैभव गुप्ता का गीत ‘ आज़ादी का एक दीवाना ‘ की प्रस्तुति की  इसमें शामिल रहे – गुंजन, अभिषेक, अर्पिता, श्रवण, मुस्कान, साहिल और पीहू।

नन्हे साथी बाएं से अर्पिता, साहिल,गुंजन,मुस्कान,पीहू,श्रवण

इस बार के आयोजन में ख़ास बात रही  युवा साथी पार्थो बनर्जी और संजय सोलोमन द्वारा भगत सिंह के क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त और सुखदेव पर बात रखना। असेंबली में बम और भगत सिंह की क्रांतिकारियों अर बात रखी जमशेदपुर इप्टा के अध्यक्ष अहमद बद्र ने। कार्यक्रम का संचालन पार्थो ने किया उन्होंने भगत सिंह को याद करने के लिए कार्यक्रम का आगाज़ जोश मलीहाबादी के इस शेर से किया –

काम है मेरा तग़य्युर नाम है मेरा शबाब
मेरा ना’रा इंक़िलाब ओ इंक़िलाब ओ इंक़िलाब

पार्थो बनर्जी
संजय सोलोमन
अहमद बद्र

भगत सिंह की नास्तिकता पर बाबा रणधीर सिंह के साथ हुए विचार विमर्श को संवादों के जरिए वर्षा, सुजल, दिव्या और नम्रता ने प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति की खासियत यह रही कि इसकी तैयारी से पूर्व बकायदा किशोर साथियों से बातचीत कर उनकी जिज्ञासा, सवाल पर संवाद किया गया।

बाएं से दिव्या,नम्रता,वर्षा और सूजल

इस प्रस्तुति के बाद नन्हे और किशोर साथियों ने सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, फ़ना नहीं है मोहब्बत के रंगो बू के लिए और अंत में शहीदों की याद में एक बांग्ला गीत की प्रस्तुति दी। बांग्ला गीत जो कि मोहिनी मोहन चौधरी द्वारा रची गई ऐसी रचना है जो कि 100 वर्ष पुरानी है जिसके बोल और धुन ऐसी है कि एक बार सुन लेने के बाद लगातार सुनने और गाने का मन होता है। इस गीत से परिचय कराया साथी पार्थो ने। हम सभी को इस गीत का अर्थ समझते हुए गाना सिखाने का अभ्यास कराया। थोड़ा – थोड़ा सीखते साथियों ने इस गीत को सिर्फ गाया ही नहीं बल्कि स्वयं हारमोनियम में बजाकर प्रभावी प्रस्तुति दी।

श्रवण,अर्पिता,गुंजन,साहिल,अभिषेक,सूजल,मुस्कान,वर्षा,दिव्या,सुरभि

इस बार 27 सितंबर को ओपन माइक के आयोजन में भी इप्टा ने हिस्सेदारी की। जुबिली पार्क में हुए खुले आयोजन में भगत सिंह की पसंदीदा नज़्म और ग़ज़ल को गाने के अनुभव से वे समृद्ध हुए।

जुबिली पार्क में ओपन माइक ‘अनम्यूट’ में इपता के साथी और भगत सिंग की भूमिका में प्रेम शर्मा

आज जिस तरह के हालात देश के हैं उसमें बढ़ती सांप्रदायिकता के बीच में क्रांतिकारियों को सही तरीके से याद करने का सिलसिला धीमा हो चला है पर हाल में जेन ज़ी का निरंतर बढ़ता दख़ल उम्मीद से भरता है कि ये पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियां भगय सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के सपने की दुनिया को बदलने का संकल्प ले लिए हैं इस पीढ़ी के साथ हम भी कोशिश कर रहे हैं कि चेतनशील हों और बेहतर दुनिया बनाने के रास्ते में आगे बढ़ें।

आयोजन की कुछ छवियाँ

One thought on “भगत सिंह जयंती”

  • Mrigendra

    जरूरी आयोजन। महान क्रांतिकारी की याद में आयोजित यह कार्यक्रम जिसमें हर पीढ़ी के लोग सहभागी हुए अपने आप में एक सुखद एहसास की तरह।

    आपकी सक्रियता को सलाम।
    जिंदाबाद।।

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