याद ए पुरखे

साहिर के साथ -२

साहिर की नज़्म पढ़ने के बाद

कविता में

तस्वीर है जीवन की
रंग है बचपन का।

बाँकपन है जवानी का
एहसास है ढलती उम्र का।

कविता—आगाज़ भी
आवाज़ भी
हुस्न है मोहब्बत का
मोहब्बत की पहचान भी।

कविता के समंदर में भी
जो डूब सके – वही उभरते हैं
और जो उभर आए –
वे फिर डूब ही जाते हैं।

उसी तरह जैसे खुसरो

मोहब्बत पर
कह गए—
जो डूबा, वह उबरा;
जो उबरा, वह डूब गया।

कविता के लिए लिखने में हर बार कुछ शेष रह जाएगा और हर बार कुछ नया जुड़ता जाएगा जो ऐसा भी नहीं होगा कि पहली बार कहा गया हो और न ही ऐसा होगा कि दोबारा न कहा जाए। इसी ख़ूबसूरती और ख़ूबी की वजह से हम कविता की दुनिया में जीते हुए सच की दुनिया की हैवानियत से लड़ पाने,अकेलेपन से उबरने और बेबसी को दूर कर पाने की कोशिश कर पाते हैं।

एक बच्चा भी गीत और कविता सुनकर बहुत से अनुभवों से गुज़रता है और उसकी कल्पनाशक्ति को उड़ान मिलती है। बचपन में गाए हर कविता और गीत को दोहराने का आनंद मध्य आयु या बुढ़ापे में ही महसूस हो सकता है जिसकी बदौलत हम उम्र को जीत बचपन की दहलीज़ पर फिर से दस्तक दे पाते हैं। वैसे हर देश – प्रदेश के अपने कुछ गीत और कविता पहचान होती है जिन्हें दोहराने से कोई भी ख़ुद को रोक नहीं पाता। ये किस तरह से हमारे जीवन में घुल-मिल जाते हैं हमें पता ही नहीं चलता।

किशोर साथियों द्वारा साहिर के बारे में पता करने की तैयारी वाया मोबाइल

बच्चा है महान
साहिर लुधियानवी


तुझ में ईश्वर

अल्लाह तुझ में
तुझ में जीसज़ पाया

बच्चे में है भगवान
बच्चे में रहमान

बच्चा जीसज़ की शान
गीता इस में

बाइबल इस में
इस में है क़ुरआन

बोलो बच्चा है महान
जग में बच्चा है महान

मंदिर मस्जिद और गिरजे में इस का नूर समाया
इस नन्ही सी जान में छुप कर वो अपने घर आया

पापी मन को पावन करती इस की हर मुस्कान
बोलो बच्चा है महान

जग में बच्चा है महान
ज्ञानी सब में भेद करावे बच्चा मेल करावे

हम जैसे भूले-भटकों को सीधी राह दिखावे
इस के भोले-पन पर सदक़े दुनिया-भर का ज्ञान

बोलो बच्चा है महान
जग में बच्चा है महान।

इस नज़्म को पढ़ने और थोड़ी बात करके बच्चों से ३ सवाल पूछे-

१ . बच्चे ज़्यादा महत्वपूर्ण क्यों हैं ?

२ . आप पर कोई ज़िम्मेदारी है ?

३ . साहिर क्यों बोल रहे हैं कि बच्चा है महान ?

  • बच्चे नहीं रहेंगे तो खुशी जैसा नहीं लगेगा इसलिए महान कहा है। हम लोग कितना भी कुछ कर लें बच्चों को देख बड़े पिघल जाते हैं। कभी – कभी हम इसका फ़ायदा भी उठाते हैं और थोड़ी बदमाशी भी करते हैं।
  • हम लोग महान हैं क्योंकि हम लोगों में तीन चीज़ें हैं – भगवान , ईश्वर , अल्लाह । अगर बच्चे नहीं होते तो मन नहीं लगता।
  • बच्चे इसलिए ज़रूरी कि मानव सभ्यता आगे बढ़ सके। वंश आगे ले जाते हैं। खुशी के लिए बच्चे होते हैं।
  • बच्चे लोग intelligent होते हैं। सभी लोग जो भगवान् – भगवान करते हैं जिसको देखे नहीं असल में तो बच्चे ही भगवान होते हैं क्योंकि वे मन के सच्चे होते हैं।
  • दुनिया में बच्चे ज़रूरी हैं।

जो सवाल किये उसके समझने के बाद भी पूरी बात नहीं आई तो उनसे सवाल किया कि यह बताओ कि आप अपने घर में क्यों ज़रूरी है ?

  • इसलिए ज़रूरी हूँ क्योंकि मैं थोड़ा बड़ा हो गया हूँ।
  • घर में हर चीज़ के लिए लड़ाई होती है , मम्मी और दादी लड़ती हैं तो उन्हें चुप कराने के लिए मैं ज़रूरी हूँ।
  • बच्चे नहीं रहेंगे तो उनकी याद आएगी।
  • मेन्टल सपोर्ट के लिए मैं ज़रूरी हूं।
  • क्योंकि मेरा भाई बदमाशी करता है तो उसे रोकने के लिए ज़रूरी हूँ।
  • जो घर वाले नहीं कर पाए वो हम सीखें । सबके लिए हम ज़रूरी हैं।
  • घर में हम ज़रूरी हैं कि घर के हालात बदल पाएं। माँ-पापा का सहारा बनने के लिए।
  • बच्चे इसलिए ज़रूरी हैं कि कोई डॉक्टर तो कोई टीचर या अन्य व्यवसाय कर सके।
  • अगर बच्चे नहीं होंगे तो बूढ़े लोग चल नहीं पाएंगे। हम बच्चे बूढ़ों को,दीदी आपको ( यानी मुझे सम्बोधित किया ) कहीं ले जा पाएंगे। बड़े जैसी हमारी देखभाल किये वैसी हम उनकी करेंगे।
  • बच्चे हर ग़लत चीज़ के लिए आवाज़ उठाते हैं। जेन जी आज के समय में हर गलत बात के लिए आवाज़ उठा रही है। अपने को देख के हालात , वातावरण बदलने की कोशिश कर रहे हैं। एक गीत सुना है वो महलों का राजा —- ऐसी बेटी तो इस गीत के लिए यहां जनरेशन कह रही है कि ऐसा लड़का चाहिए हमें अपने घर और दुनिया में।
  • बच्चे ज़रूरी हैं सबसे छोटे हैं तो जीवन में आख़िर तक रहेंगे।
  • बच्चे इसलिए ज़रूरी है कि वो सब लोगों को आपस में मिलाते है। कविता इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे हम दूसरो से मिल पाते हैं।

साहिर ने बच्चों के लिए कई नज़्में , फिल्म के लिए गीत लिखे जिन्हें हम आज तक गुनगुनाते हैं। उनमें जीवन और दर्शन की गहरी बातें बड़ी ख़ूबसूरती से कही गई हैं। उनकी देश को लिखी एक नज़्म भी हम लोगों ने पढ़ी –

ऐ वतन की सरज़मीं
साहिर लुधियानवी


यूँ तो हुस्न हर जगह है

लेकिन इस क़दर नहीं
ऐ वतन की सरज़मीं

ये खुली खुली फ़ज़ा
ये धुला धुला गगन

नद्दियों के पेच-ओ-ख़म
पर्बतों का बाँकपन

तेरी वादियाँ जवाँ
तेरे रास्ते हसीं

ऐ वतन की सरज़मीं
तेरी ख़ाक में बसी

माँ के दूध की महक
तेरे रूप में रची

स्वर्ग लोक की झलक
हम में हैं कमी रही

तुझ में कुछ कमी नहीं
ऐ वतन की सरज़मीं

तेरी ख़ाक की क़सम
हम तुझे बचाएँगे

दुश्मनों की फ़ौज पर
बिजलियाँ गिराएँगे

नौजवान नस्ल की
हिम्मतों पे रख यक़ीं

ऐ वतन की सरज़मीं।

बच्चों को बताया कि कविता में वतन का ज़िक्र है। बच्चों से कविता समझने का एक उपाय समझ आया है कि उन्हें कुछ सवाल सरल रूप में किये जाएं तो वे बोलने में सहज होते हैं। इस कविता को पढ़ने के बाद के सवाल थे –

१ . आपके लिए कौन सी ख़ूबसूरती ज़रूरी है ?

  • हरियाली की ख़ूबसूरती होनी चाहिए।
  • परिवार ख़ूबसूरत होना चाहिए।
  • सोच अच्छी होनी चाहिए।
  • ज्ञान
  • व्यवहार अच्छा होना चाहिए , रहने की जगह ख़ूबसूरत होनी चाहिए ।
  • लोगों की सोच ख़ूबसूरत होनी चाहिए।
  • जब भेदभाव नहीं करेंगे तो लोग ख़ूबसूरत होंगे।
  • बराबरी
  • देश में हर इंसान सबको बराबर की नज़र से देखे तो खूबसूरती होगी।
  • दोस्ती
  • नज़रिया सही होना चाहिए।

ग़ौर कीजिये कि ‘ बच्चे ‘ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह विडम्बना है कि आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद भी हम अपनी नई पीढ़ी को बेहतर दुनिया नहीं दे पाए , वे अभी भी सपने देख रहे हैं कि कब वे सपने तामीर हों, हक़ीक़त बनें।

तन्मय होकर पढ़ता नन्हा अभिषेक

अगला सवाल था –

२ . देश के लिए आप बच्चे कुछ कर सकते हैं ? बच्चों को क्या करना चाहिए ?

  • जाति-धर्म पर लड़ाई नहीं करना चाहिए ।
  • पढ़-लिख के अच्छा नागरिक बन सकते हैं।
  • देश का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए जैसे बैठकर जन गण मन नहीं गाना चाहिए ( तीसरी में पढ़ने वाली साथी का जवाब )
  • स्वच्छता रख सकते हैं।
  • २६ जनवरी और १५ अगस्त में जो लोग झंडा फ़ेंक देते हैं उन्हें नहीं फेंकना चाहिये । मेरा झंडा अभी तक घर में संभालकर रखा हुआ है ( तीसरी का नन्हा साथी )
  • हक़ के लिए लड़ सकते हैं। जब यह पूछा कि हक़ मांगने के लिए क्या करना होगा तो जवाब मिला हिम्मत करनी होगी और सवाल करना होगा।
  • अच्छे से स्कूल जाएं और पढ़ें।
  • इज़्ज़त, बराबरी , दोस्ती से रहेंगे तो देश का नाम रौशन करेंगे।
  • साफ़ – सफ़ाई रख सकते हैं।

३ . इससे पहले कोई वतन / देश पर कविता या गीत सुनें हो ?

इस सवाल के जवाब में ढेर-सारे गीत बच्चों ने बताये जो है –

  • ऐ मेरे वतन के लोगों
  • तेरे पैग़ाम पर ऐ वतन ( फ़ैज़ अहमद फ़ैज़- इसे लिटिल इप्टा के साथियों ने गाया है )
  • तेरी मिट्टी में मिल जावां
  • ऐ वतन तेरे लिए
  • ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू
  • संदेशे आते हैं भारत माँ की आँख के तारों ( साहिर लुधियानवी – इसे लिटिल इप्टा के साथियों ने गाया है )
  • सबसे ऊंची विजय पताका
  • जिस देश में गंगा बहती है रंगीला देश
  • सारा हिन्दुस्तान हमारा
  • ए अर्ज़ ए दीवान ए जहां
  • जहां भोर सुहानी
  • वन्देमातरम
  • बंद इ उत्कल जननी ( ओड़िया गीत )
  • जन गण मन
  • दिल दिया है जान भी देंगे
  • सरफ़रोशी की तमन्ना
  • तू ज़िंदा है

आज साहिर का जन्मदिन है जो हम सबके महबूब शायर हैं और पिछले कुछ दिनों में हम लोगों ने उनकी कुछ रचनाएं पढ़ने-समझने की कोशिश की। साहिर को याद करने के बहाने से बच्चों के साथ पढ़ने के विरल अनुभवों से समृद्ध हो रही हूँ और बहुत कुछ ऐसा समझ पा रही हूँ जिसे बचपन की खिड़की से ही देखा जा सकता है। अकसर ही बच्चों से कहती हूँ कि तुम्हारी उम्र में साहिर और फ़ैज़ का नाम भी नहीं सुना था। सच ! हमारे ये साथी उम्मीद हैं हमारी , आप सभी साथी पढ़ने के इस अभ्यास से धीरे-धीरे ख़ुद को बनाने में, गढ़ने में लगे हैं। हमारे समाज में श्रेष्ठता और काबिलियत के मापदंड सीमित हैं और लोगों का नज़रिया-दायरा भी सीमित पर इस सीमा को लांघकर अपने होने की परिभाषा को रचेंगे, दुनिया को सीमा से असीम करेंगे ये बच्चे । इन बच्चों के साथ रहकर मुझे समझ आ रहा है कि अगर सही समय में किताबों से दोस्ती हो गई तो इंसान बनने की काबिलियत बच्चों में होती है और इसमें गीत – संगीत , नृत्य और नाटक जुड़ जाएं तो जीती-जागती कविता बन जाएंगे जो साहिर के सपनों के बच्चों और दुनिया को साकार करेंगे।

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