नई कलम

दस्तक नई कविता की

सुजल की कविता उम्मीद की रोशनी है। आज उसे दो विषय दिए जो एक-दूसरे से जुड़े थे और उसने यह कविता लिखी। उसकी रचनाशीलता बरकरार रहे।

बातचीत

सुजल

मैंने खुद से पूछा ‘क्या होती है बातचीत ?’

क्या खुद से बात करने को कहते हैं बातचीत ?

क्या गुस्से में किसी को गालियां देनी होती है बातचीत ?

या दोस्तों से गप्पे लड़ाने को कहते हैं बातचीत?

तो मेरे मन ने कहा -‘जो तुम और मैं कर रहे हैं उसे कहते हैं बातचीत। ‘

टीचर का बच्चों से सवाल करना और बच्चों का जवाब देने को भी कह सकते हैं बातचीत।

माँ का बेटियों को लोरी सुनाना होती है बातचीत

दादी-नानी का पोते-पोतियों को कहानी सुनाना होती है बातचीत।

दुखी होने पर एक-दूसरे से दुःख बांटने को कहते हैं बातचीत

किस्से – कहानियाँ सुनाने को कहते हैं बातचीत।

दुनिया में लोग हर भाषा में करते हैं बातचीत

गीत गाकर, कविता सुनाकर सन्देश पहुंचाने को कहते हैं बातचीत।

पीड़ितों को प्रताड़ित करने वाले के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने को

हड़ताल करके इन्साफ, न्याय और अपनी हक़ माँगने को

ज़ुल्म करनेवालों के खिलाफ़ बगावत करने को

मेरे हिसाब से कहते हैं बातचीत।

सुजल की ताज़ा कविता

One thought on “दस्तक नई कविता की

  • हरनाम सिंह

    युवा संभावना शील कविता और कवि

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