फ़लिस्तीन आँखों देखी वाया कॉमरेड विनीत तिवारी
किसी देश की यात्रा से हम उस देश के नागरिकों की सामाजिक-राजनैतिक स्थिति और संस्कृति से परिचित होते हैं। अकसर
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Read Moreसाहिर की 105 वीं जयंती पर उन्हें याद करना सिर्फ एक रवायत नहीं बल्कि उनके बेहतर दुनिया देखने और जीने
Read Moreकविता में तस्वीर है जीवन कीरंग है बचपन का। बाँकपन है जवानी काएहसास है ढलती उम्र का। कविता—आगाज़ भीआवाज़ भीहुस्न
Read Moreकविता के आँगन में बसर करना कविता से बात करना कविता के साथ मौन चलना कविता के साथ रोना-हँसना और
Read Moreसुजल की कविता उम्मीद की रोशनी है। आज उसे दो विषय दिए जो एक-दूसरे से जुड़े थे और उसने यह
Read Moreकविता वक्तव्य नहीं गवाह है-कुंवर नारायण कविता वक्तव्य नहीं गवाह हैकभी हमारे सामनेकभी हमसे पहलेकभी हमारे बाद कोई चाहे भी
Read Moreसमय के साथ कैसे चलें, समय से आगे कैसे चलें इस सवाल से दो-चार होना आम बात है इस चिंतन
Read Moreजीवन देखना, बरतना और उससे आगे जाकर जीवन संवारने का हुनर सीखने के लिए कहानियों के लेंस का इस्तेमाल हम-आप
Read More‘ह्यूमंस इन द लूप’ फिल्म के बारे में लिखने बैठी हूँ तो सोच रही हूँ कि कहाँ से शुरू करूँ।
Read Moreथियेटर में असीम संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं पर निरंतर विचार- विमर्श हो रहा है और रंगकर्मी लगातार काम कर के,
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